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“भगवान के फज़ल से”

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"भगवान के फज़ल से" – #Urduwood के रत्न इस अतिनिकृष्ठ नौटंकी में लेखक ने 'भगवान' को ही उपहास-पात्र क्यों चुना? क्या ये 1400 वर्षों की शांतिप्रिय संस्कृति पर भी इतने उदारभाव से 'मनोरंजन' बना सकते हैं? 'Soft power', अथवा पड़ोसी-मुल्क का प्रचार-तंत्र?

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“भगवान के फज़ल से”

– #Urduwood के रत्न

इस अतिनिकृष्ठ नौटंकी में लेखक ने ‘भगवान’ को ही उपहास-पात्र क्यों चुना?

क्या ये 1400 वर्षों की शांतिप्रिय संस्कृति पर भी इतने उदारभाव से ‘मनोरंजन’ बना सकते हैं?

‘Soft power’, अथवा पड़ोसी-मुल्क का प्रचार-तंत्र?

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