GEMS OF BOLLYWOOD
Shared by @SanjeevSanskrit — वही शाहनवाज खान जिसने शरीयत आधारित मुस्लिम पर्सनल कानून की…

Shared by @SanjeevSanskrit — वही शाहनवाज खान जिसने शरीयत आधारित मुस्लिम पर्सनल कानून की मांग रखी थी 1967 में और चुनाव हारे थे?
जिसके अंतर्गत कांग्रेस ने शाहनवाज कमिटी बनाई थी जिसने नेताजी की मृत्यु प्लेन दुर्घटना में हुई है, यह शीघ्र निर्णय दे दिया था? जो नेताजी के परिवार व अन्य लोगों को मान्य नहीं था?
महान स्वतंत्रता सेनानी जनरल शाहनवाज़ खान के प्रति बीजेपी के ट्रोल सांसद की यह नफरती सोच उसके अकेले की नहीं है, बल्कि यह पूरे RSS गिरोह की सोच है। असल में RSS गिरोह के निशाने पर शाहनवाज़ खान नहीं है, असली निशाने पर हैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस। जिनकी 'आज़ाद हिंद फौज' के सिपाही थे शाहनवाज़ खान। RSS गिरोह की तड़प ये है कि 'भारत छोड़ो आंदोलन' के दौरान सुभाष बाबू ने ऐसे सांप्रदायिक गिरोहों को सरेआम रेडियो पर अंग्रेज़परस्त यानी गद्दार कहते हुए इनकी पोल खोल दी थी।
31 अगस्त 1942 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जिन्ना और सावरकर को बराबर तौलते हुए चेतावनी भरे लहजे में कहा था –
"मैं श्री जिन्ना, श्री सावरकर और सभी उन नेताओं से, जो अब भी ब्रिटेन से समझौते की बात सोचते हैं, अनुरोध करूंगा कि वे पूरी तरह समझ लें कि कल की दुनिया में ब्रिटिश साम्राज्य नहीं रहेगा। उन सभी व्यक्तियों, समूहों या पार्टियों को, जो आज़ादी की लड़ाई में भाग ले रहे हैं, कल के भारत में सम्मानजनक स्थान मिलेगा। ब्रिटिश साम्राज्यवाद के समर्थकों का स्वाभाविक तौर पर नगण्य स्थान होगा।"
1 जनवरी 1943 को सुभाष बाबू ने देशभक्त भारतीयों का कर्तव्य बताते हुए फिर कहा –
"जो भारतीय स्वतंत्रता के युद्ध में शरीक होने से इनकार करते हैं, वे देशद्रोही हैं।"
सहज ही समझा जा सकता है कि वे किसकी तरफ इशारा कर रहे हैं। यही वजह है कि RSS गिरोह को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विरासत से इतनी नफरत है। इससे यह भी साफ हो रहा है कि बीजेपी सांसद 1946 तक जिन्ना को आज़ादी की लड़ाई का सहभागी साबित करने पर क्यों तुला है।
