GEMS OF BOLLYWOOD
Shared by @GemsOfBollywood — अत्यंत आवश्यक निर्णय। @NCPCR_ को नमन। ७० के दशक में,…

Shared by @GemsOfBollywood — अत्यंत आवश्यक निर्णय। @NCPCR_ को नमन।
७० के दशक में, जब पठान गैंग का वर्चस्व बढ़ने लगा, ऐसी बहुत फिल्में बनी जहां हिंदू बच्चे के लिए इस्लामी शिक्षा सबसे उत्तम सिद्ध की गई।
उदाहरण:
१. मुकद्दर का सिकंदर जहां हिंदू बच्चे को जीवन का फलसफा एक फकीर देता है, पालन पोषण मुसलमान बेवा करती है
२. अमर अकबर एंथोनी जहां मुसलमान एक अनाथ हिंदू बच्चे को सड़क से उठा कर अकबर बना देता है। पुलिस को रिपोर्ट भी नहीं करता
३. दादा जिसमें एक हिंदू परिवार तालीम के लिए दिन में अपनी बेटी को एक मुस्लिम बेवा के यहां भेजते हैं जो उन्हें अल्लाह करम करना सिखाती है
४. विधाता जिसमे शिव भक्त अपने पोते को १८ साल के लिए अबू मियां को दे देता है ताकि वो एक नेक इंसान बन सके
५. फिरोज खान का अब्दुल्लाह तो अलग ही स्तर था। वहां अरब में दिखाया गया की कैसे अरबी हिंदू मंदिरों और पंडितों की रक्षा करते हैं। और एक अनाथ हिंदू बच्चे की रक्षा, शिक्षा, पालन अब्दुल्लाह करता है क्योंकि बच्चे की मरती मां को दिव्य आदेश हुआ था।
ऐसे अनेकों उदाहरण है।
हर प्रकार से साधारण हिंदू पर मदरसा थोपा गया है। इसमें भाग लेने वालों को हम आज महानायक कहते है और रिश्ते में अपना बाप बनाते हैं। 🤦
मदरसा ,इस्लामिक मज़हबी शिक्षा सिखाने का केंद्र होता है और शिक्षा अधिकार क़ानून के दायरे के बाहर होता है।
ऐसे में मदरसों में हिंदू व अन्य ग़ैर मुस्लिम बच्चों को रखना न केवल उनके संवैधानिक मूल अधिकार का हनन है बल्कि समाज में धार्मिक वैमनस्य फैलने का कारण भी बन सकता है।
इसलिए @NCPCR_ ने देश की सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया था कि संविधान के अनुरूप मदरसों के हिंदू बच्चों को बुनियादी शिक्षा का अधिकार मिले इसलिए उन्हें स्कूल में भर्ती करें और मुस्लिम बच्चों को भी धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ शिक्षा का अधिकार देने के लिए प्रबंध करें।
तत्संबंध में उत्तरप्रदेश की राज्य सरकार के मुख्यसचिव महोदय ने आयोग की अनुशंसा के अनुरूप आदेश जारी किया था।
समाचार पत्रों के माध्यम से पता चला है कि जमीयत ए उलेमा ए हिन्द नामक इस्लामिक संगठन इस आदेश बारे में झूठी अफ़वाह फैला कर लोगों को गुमराह कर सरकार की ख़िलाफ़त में जन सामान्य की भावनाएँ भड़काने का काम कर रहा है,ये मौलवियों का एक संगठन है जो कि मदरसा दारुल उलूम देवबंद की एक शाखा ही है जो कि जिसके द्वारा गजवा ए हिन्द का समर्थन करने पर आयोग ने कार्रवाई की है।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष उत्तरप्रदेश के देवबंद से सटे हुए एक गाँव में चल रहे एक मदरसे में एक गुमशुदा हिंदू बच्चे की पहचान बदलने और ख़तना कर धर्मांतरण करने की घटना से सांप्रदायिक सामंजस्य बिगड़ा था।
ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी ये कार्यवाही ज़रूरी है।
उत्तरप्रदेश में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम भी लागू है, किसी को भी बच्चों की धार्मिक स्वतंत्रता उल्लंघन नहीं करना चाहिए।
मेरी जनसामान्य से यह हाथ जोड़कर विनती है कि ये मामला बच्चों के अधिकार का है किसी भी कट्टरपंथी कठमुल्ले के बहकावे में न आयें और बच्चों के एक बेहतर भविष्य का निर्माण करने में सहभागी बनें।
अफ़वाह फैलाने वालों पर कार्रवाई हेतु सरकार से पृथक निवेदन किया जा रहा है।
