राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने एक आदेश जारी कर 30 नवंबर की आधी रात तक दिल्ली-एनसीआर समेत देश के हर उस शहर में पटाखे जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है जहां की हवा “बेहद खतरनाक” या “खतरनाक” स्तर पर पहुँच गई है।  यदि इस पैमाने को सही माने तो केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग (CPCB) द्वारा जारी लिस्ट में देश के अधिकांश शहरों में प्रदूषण का स्तर “खतरनाक” है।

किन्तु वायु प्रदूषण (Air Pollution) को लेकर एनजीटी की चिंता कुछ हद तक ही ठीक है। जैसे-जैसे हम अपनी पौराणिक परम्पराओं से दूर होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे हम प्रकृति से भी नाता तोड़ते जा रहे हैं।  खुद को आधुनिक कहलाने की होड़ में हम उन हिन्दू मान्यताओं और परम्पराओं से बहुत दूर हो रहे हैं जिनमें घर में लगे तुलसी के पौधे से लेकर बाग में लगे बरगद के पेड़ की पुजा और सेवा करना सिखाया गया है।

एनजीटी के माननीय न्यायाधीश महोदय अगर पटाखों को ही प्रदूषण का असली कारण मानते हैं तो बेहतर होगा कि वे सम्पूर्ण भारत वर्ष को “पटाखा फ्री देश” (Cracker free country)  घोषित कर दें।  न पटाखे होंगे और न होगा उनसे प्रदूषण और शोर। 

माननीय ग्रीन कोर्ट से अनुरोध है कि वह पटाखों के साथ-साथ बॉलीवुड सितारों और नेताओं के भारी-भरकम लाव लश्कर के साथ होते दौरों पर भी थोड़ी कृपा दिखाएँ।  अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते ये तथाकथित सेलब्रिटी निजी विमानों में (Private Jet) सफर करते हैं और जब जमीन पर होते हैं तो डीजल/पेट्रोल से चलने वाली दर्जनों गाड़ियों का काफिला साथ लेकर चलते हैं।  ये सितारे ही हमें दीवाली पर पटाखे न छुड़ाने की अपील भी करते दिखाई देते हैं।

आशा है माननीय ग्रीन कोर्ट देर सबेर ही सही मगर हमारी इस अपील पर अवश्य ध्यान देगी। 

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